Shivpujan
ओम नमः शिवाय - सभी भक्तजनों को सावन मास की हार्दिक शुभकामनाएं, भोलेनाथ आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें |
----- || शिव की मानस पूजा ||-----
1. शिव पूजन विधि
मन से कल्पित सामग्री द्वारा की जाने वाली पूजा को ही मानस पूजा कहा जाता है | इस पूजा को ब्र्ह्म पूजा से शास्त्रो मई हज़ार गुना मह्त्वपूर्ण बताया गया है | मानस पूजा का आदि गुरु शंकराचार्य जी ने भी वर्णन किया है | जो लक्ष्मी कि प्राप्ति की इच्छा करता हो वः कमल, बिल्वपत्र, शतपत्र और शंख पुष्प से भगवान् शिव की पूजा करें | यदि एक लाख कि संख्या में इन पुष्पो द्वारा भगवान् शिव की पूजा संपन्न हो जाये तो सारे पापों का नाश होता है और लक्ष्मी कि भी प्राप्ति हो जाती है |
............................................................................................................................................................................. 2. बिल्व पत्र तोड़ने का निषिद्ध काल
चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिधि को सक्रांति के समय और सोमवार को बिल्वपत्र न तोड़े, किन्तु बिल्वपत्र भगवान् शिव को अति प्रिय है | अत: निषिद्ध समय में पहले दिन का रखा हुआ बिल्वपत्र चढ़ाना चाहिए | शास्त्र ने तो यहाँ तक कहा गया है कि नया बिल्वपत्र न मिले तो चढ़ाये हुए बिल्वपत्र को ही पुनः शुद्ध जल से धोकर बार बार चढ़ाते रहे, इसमें कोई दोष नहीं है | फूल तोड़ते समय क्रमश: ॐ वरुणाय नमः: ॐ व्योममाय नमः ॐ पृथीवयो नमः बोले |
............................................................................................................................................................................. 3. पूजा में बासी जल, फूल का निषेध
भगवान पर चढ़ाया हुआ, सुंघा हुआ या अंग से लगाया हुआ फल-फूल निर्माल्य तुल्य होता है, अत: इसे न चढ़ाये | अपवित्र स्थान में उत्पन्न, अपवित्र पात्र में रखा हुआ, आग से झुलसा हुआ, कीड़ायुक्त, जो सुंदर न हो, जिसकी पंखुड़ियाँ बिखर गयी हो, पृथ्वी पर गिरा हुआ हो, जो खिला हुआ न हो, निर्गंध य अगंध वाला फूल देवताओं पर न चढ़ाएं | कलियों को चढ़ाना निषेध है | किन्तु यह नियम कमल पुष्प पर लागो नहीं होता |
............................................................................................................................................................................. 4. पुष्पादि चढाने उतारने की विधि
सर्वप्रथम अपने हाथ से तीन बार आचमन करें | हाथ धोने के बाद दाहिने हाथ में जल, पुष्प और चावल लेकर ॐ नमः शिवाय: का मंत्र जाप करते हुए भगवान् शंकर का मानसिक आवाहन करें | ततपश्चात शिवलिंग पर जल चढ़ाये | क्रम से दूध, दही, घी, शहद, शककर चढ़ाएं | और दोनों हाथों से शिव जी का मंझन करे | तत्पश्चात क्रम से शुद्ध गंगा जल अथवा जल, इत्र और सुगन्धित जल से स्नान कराएं | क्रम से वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, चंदन, भस्म, कुमकुम, बेलपत्र, पुष्पमाला यदि सम्भव हो तो सभी पत्र एवं मदार का पुष्प चढ़ाएं | इसके बाद नित्य पूजन में गुर्च, तिल, जौ, धतूरे का पुष्प एवं फल चढ़ाते हुए धुप- दीप दिखाकर मिठाई का भोग लगाएं | फिर पान में कमल गट्टा, सुपाड़ी, इलायची, लौंग रखकर भगवान को अर्पित करे इसके बाद फल चढ़ाएं |
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